Who Is Rohitash Khilari? जिन्होंने जान जोखिम में डाल बनाया विश्व रिकॉर्ड?

Rohitash Khilari: जहां आम इंसान कुछ मिनट भी ठीक से सांस नहीं ले पाता, जहां शरीर जवाब देने लगता है और दिमाग सुन्न हो जाता है, उसी जगह एक भारतीय पर्वतारोही ने 24 घंटे तक डटे रहकर इतिहास रच दिया। यह कहानी है हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले रोहताश खिलारी की, जिन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन के 24 घंटे रुककर एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड बनाया, जो आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है।

यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि साहस, धैर्य, जुनून और देशभक्ति की वह कहानी है, जो हर युवा को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देती है। माइनस 40 डिग्री तापमान, 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती बर्फीली हवाएं और चारों तरफ मौत का सन्नाटा—इन हालातों में 24 घंटे टिके रहना आसान नहीं था। लेकिन रोहताश खिलारी ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो असंभव भी संभव बन सकता है।

रोहताश खिलारी कौन हैं? (Who Is Rohitash Khilari?)

रोहताश खिलारी एक भारतीय पर्वतारोही और विश्व रिकॉर्डधारी हैं। वे हरियाणा के हिसार जिले से ताल्लुक रखते हैं और एक साधारण किसान परिवार में जन्मे हैं। सीमित संसाधनों और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने जिस स्तर की उपलब्धियां हासिल की हैं, वह उन्हें खास बनाती हैं।

रोहताश का नाम तब सुर्खियों में आया, जब उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के 24 घंटे तक रुकने का रिकॉर्ड बनाया। इस उपलब्धि के बाद वे न सिर्फ भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय में भी एक चर्चित नाम बन गए।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

रोहताश खिलारी का बचपन साधारण परिस्थितियों में बीता। उनकी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूलों में हुई। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें शारीरिक फिटनेस, दौड़ और खेलों में गहरी रुचि थी। गांव के माहौल में रहते हुए उन्होंने मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का असली मतलब सीखा।

पर्वतारोहण जैसे खतरनाक और खर्चीले क्षेत्र में आने का सपना देखना आसान नहीं था, लेकिन रोहताश ने अपने जुनून को कभी मरने नहीं दिया। उन्होंने खुद से सीखने, फिटनेस पर काम करने और मानसिक मजबूती बढ़ाने पर खास ध्यान दिया।

साधारण परिवार से असाधारण सफलता तक का सफर

रोहताश खिलारी के पिता एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। परिवार के पास ज्यादा संसाधन नहीं थे, लेकिन सपनों का साथ देने का हौसला जरूर था। परिवार ने हर मुश्किल में उनका साथ दिया, चाहे हालात कितने ही कठिन क्यों न हों।

यही कारण है कि रोहताश की कहानी को आज ‘ग्राउंड जीरो से ग्लोरी’ तक की यात्रा कहा जाता है। बिना किसी बड़े सपोर्ट सिस्टम के, सिर्फ मेहनत और जुनून के दम पर उन्होंने दुनिया की सबसे कठिन चोटियों को फतह किया।

माउंट एल्ब्रुस: यूरोप की सबसे ऊंची चोटी

माउंट एल्ब्रुस रूस में स्थित है और इसकी ऊंचाई लगभग 5,642 मीटर है। यह यूरोप की सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है। इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होता है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।

यहां का मौसम बेहद खतरनाक होता है। अचानक बर्फीले तूफान, तेज हवाएं और अत्यधिक ठंड किसी भी पर्वतारोही के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसे में बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के लंबे समय तक यहां रुकना लगभग असंभव माना जाता है।

24 घंटे बिना ऑक्सीजन: एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड

रोहताश खिलारी ने माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर बिना ऑक्सीजन के पूरे 24 घंटे बिताकर इतिहास रच दिया। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला रिकॉर्ड है। इससे पहले किसी भी इंसान ने इतनी ऊंचाई पर इतनी लंबी अवधि तक बिना ऑक्सीजन के रुकने का साहस नहीं किया था।

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि मानव सहनशक्ति, मानसिक दृढ़ता और शारीरिक मजबूती का अद्भुत उदाहरण है। इस रिकॉर्ड के बाद रोहताश एक्सट्रीम एंड्यूरेंस और ह्यूमन लिमिट्स पर होने वाले रिसर्च के लिए भी एक महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं।

जान जोखिम में डालने वाला सफर

इस सफर में रोहताश को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा। अत्यधिक ठंड के कारण उनकी दो उंगलियां शीतदंश का शिकार हो गईं। हालात इतने खतरनाक थे कि कई बार जान जाने का खतरा साफ नजर आ रहा था।

न्य पढ़े-

Amazon Great Indian Festival vs Flipkart Big Billion Days 2025: किस सेल में मिलेगा सबसे बड़ा डिस्काउंट?

Mausam Me AQI Kya Hai?: इसका हमारे स्वास्थ्य पर क्या असर होता है?

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि तिरंगे की शान का सवाल था। उन्होंने मौत के डर से ऊपर उठकर अपने सपने को पूरा किया।

पहले भी फतह कर चुके हैं कई ऊंची चोटियां

माउंट एल्ब्रुस से पहले भी रोहताश खिलारी कई बड़ी उपलब्धियां अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने 16 मई 2018 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को सफलतापूर्वक फतह किया था।

इसके अलावा वे अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर भी चढ़ चुके हैं, जहां उन्होंने 24 घंटे रुकने का रिकॉर्ड बनाया था। माउंट फ्रेंडशिप, माउंट मून जैसी कई कठिन चोटियों पर भी वे सफलता हासिल कर चुके हैं।

समर और विंटर में एल्ब्रुस फतह करने का कारनामा

रोहताश उन गिने-चुने भारतीय पर्वतारोहियों में शामिल हैं, जिन्होंने माउंट एल्ब्रुस को समर और विंटर दोनों सीजन में फतह किया है। यह उपलब्धि अपने आप में बेहद खास मानी जाती है, क्योंकि अलग-अलग मौसम में पहाड़ की चुनौतियां भी बदल जाती हैं।

8 साल का इंतजार और अधूरा सपना

रोहताश का यह सपना साल 2018 में शुरू हुआ था। साल 2020 में उन्होंने 24 घंटे रुकने की कोशिश की, लेकिन अपने गाइड की जान बचाने के लिए उन्हें बीच में ही नीचे आना पड़ा।

साल 2023 में मौसम इतना खराब था कि वे सिर्फ 4 घंटे ही टिक पाए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार साल 2026 में, पूरे 8 साल बाद, उनका यह सपना पूरा हुआ।

इंस्टाग्राम पोस्ट में छलका दर्द और जुनून

रिकॉर्ड बनाने के बाद रोहताश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह सफलता 8 साल का दर्द सहने के बाद मिली है। माइनस 40 डिग्री तापमान, माइनस 50 डिग्री की ठंडी हवाएं और चारों तरफ सफेद अंधेरा—इन हालातों में वे पूरी तरह अकेले थे।

उन्होंने लिखा कि सबने कहा यह मौत को दावत देने जैसा है, लेकिन उनके लिए यह देश की शान का सवाल था।

युवाओं के लिए प्रेरणा

रोहताश खिलारी की कहानी सिर्फ पर्वतारोहण तक सीमित नहीं है। यह कहानी हर उस युवा के लिए है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

रोहताश खिलारी हेडलाइंस में क्यों हैं?

यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर 24 घंटे बिना ऑक्सीजन के रुकने का विश्व रिकॉर्ड, माउंट एवरेस्ट और अन्य कठिन चोटियों पर सफल आरोहण, और भारतीय नाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की वजह से रोहताश खिलारी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।

Conclusion

रोहताश खिलारी की कहानी साहस, संघर्ष और सफलता की जीवंत मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया कि इंसान की हिम्मत और इरादे, कुदरत की सबसे बड़ी चुनौतियों को भी मात दे सकते हैं। माउंट एल्ब्रुस पर 24 घंटे बिना ऑक्सीजन के रुकना सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारत के हौसले की पहचान है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

Leave a Comment